वरासत, दाखिल-खारिज में ढिलाई न हो सतीश महाना
लखनऊ |
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मंगलवार को राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वरासत व दाखिल खारिज करने में देरी करने वाले राजस्व अधिकारियों के खिलाफ जिम्मेदारी तय की जाए। उनके खिलाफ लापरवाही करने पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि यह हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगी राजस्व अधिकारी वरासत, दाखिल खारिज समेत अन्य मामलों मे समयबद्ध कार्रवाई करें।
उन्होंने यह निर्देश समाजवादी पार्टी के अभय सिंह के सवाल पर दिए। दरअसल,अभय सिंह ने राजस्व अधिकारियों की लापरवाही का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश में कहीं भी राजस्व संहिता की धारा-30(20) के तहत मिनजुमला खातों यानी जहां एक ही खाते में कई-कई ग्रामीणों की जमीनें हैं, उनका बंटवारा नियमबद्ध तरीके से नहीं किया जा रहा। नियम है कि कानूनगो, लेखपाल व तहसीलदार मौके पर जाएंगे और सभी पक्षों का राय कर जमीन का बंटवारा करेंगे। इसके बावजूद किसी भी जिले में यह कार्रवाई हो रही। उन्होंने कहा कि इसी कारण प्रदेश के गांव-देहातों में हत्याएं और जानलेवा हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में न्यायाधीश सुबह दस बजे अपनी अदलतों में पहुंच जाते हैं। लेकिन एसडीएम और तहसीलदार कभी भी 12बजे से पहले नहीं पहुंचते।
सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि यह नई राजस्व संहिता इसलिए बनाई गई थी, ताकि गरीब किसानों को समय पर न्याय मिल सके। उन्हें तहसीलों के दोहन से बचाया जा सके लेकिन वरासत और नाम चढ़ने आदि की कार्रवाई 45 दिन में करने के बजाए अब तो इतना वक्त लग रहा है कि नाम चढ़वाने वाला गुजर जाए तभी भी नाम नहीं चढ़ता। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह गंभीर मामला है और राजस्व अधिकारियों को चाहिए कि वे निर्धारित समय में सुनवाई करें और लोगों को न्याय दें।
उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री से कहा कि वे अधिकारियों को निर्देश जारी करें कि हर हाल में समयबद्ध न्याय सुनिश्चित किया जाए और ढिलाई करने पर कार्रवाई की जाए।
