प्रशांत किशोर भले ही अल्लाह का हवाला दें, लेकिन मुस्लिम समुदाय उन्हें क्यों सपोर्ट करे?

बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर ने मुस्लिम समुदाय को अपने पाले में मिलाने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं. बिहार बदलाव इजलास के आयोजन का मकसद भी यही है. लेकिन, सवाल है कि क्या मुस्लिम वोटर अल्लाह के नाम पर वोट देने के उनके अंदाज को सपोर्ट भी करेंगे?

प्रशांत किशोर की नजर शुरू से ही लालू यादव के M-Y फैक्टर यानी मुस्लिम-यादव समीकरण की राजनीति पर रही है – और तेजस्वी यादव को भी लगातार निशाना बनाए जाने

प्रशांत किशोर ने मुसलमानों से बीजेपी को हराने का फॉर्मूला बकायदा रखा. पीके ने कहा कि हमें आपका (मुसलमानों का) वोट नहीं चाहिए, हमें आपका साथ चाहिए.हमें आपका साथ चाहिए. साथ ही कहा कि अगर 40 फीसदी हिंदू और 20 फीसदी मुसलमान एक साथ आ जाएं तो जन सुराज की जीत तय है. इसके साथ ही उन्होंने मुस्लिम समाज के पारंपरिक नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा समुदाय को ठगा है.

प्रशांत किशोर इससे पहले मुस्लिमों को उनकी आबादी के लिहाज से विधानसभा चुनाव में टिकट देने का ऐलान कर चुके हैं