भ्रष्टाचार क्या कभी बंद हो सकता है?


कभी नहीं, बंद हुआ तो राजनीति बंद हो जायेगी। एक नेता बता दीजिए जो चुनाव आयोग द्वारा कही गई धन राशि में चुनाव लड़ कर जीत पाया हो। सच्ची सच्ची बताना, स्पष्ट जवाब बेकार है। पचास लाख में कौन विधायक, सांसद न सकता है आजकल? नीव ही गलत है तो मकान गलत बनेगा।
अफसरों को देख लो , उनका सूट ही उनके मासिक तनखाह से ज्यादा होता है। कौन से अफसर को कोई रोक पाया? IT,ED में कितने अन्दर गए और सजा पाए? इसी को Democracy ( Demo for Crazy people ) कहा जाता है। डेमोक्रेसी में अगर सब पर सामान्य कानून लागू हो जाए तो वो डिक्टेटरशिप बन जाता है।
इसलिए सिस्टम बस कुछ लोगों का डेमो कार्यवाही कर के डेमोक्रेसी को ज़िंदा रखती है। वर्ना डिक्टेटरशिप हो जाएगा। इतने जुर्माना होंगे की आम आदमी विद्रोह कर देगा।
जनता को मनोरंजन मिल रहा है, उनको उसी में खुश रहने दो। ऐसी बेकार की बात कर के उनका मन में सवाल क्यों पैदा कर रहे हो ।

देश सिस्टम चलाता है कोई दल नही। हर दल केवल उन से मिन्नत कर अपनी कुछ बातें मनवा लेता है।ट्रैफिक वाले केवल ३०% चौराहे पर CCTV चालू रखते है जो वीवीआईपी इलाके में होते है। बाकी जगह केवल सीसीटीवी के खोल होते है या तार नही जुड़ा होता है। नियम तोड़ने वाले अगर कानूनी तौर पर हफ़्ते में एक बार नियम तोड़े तो हज़ार का फाइन होगा। यही 5 हजार महीना। 20 हजार कमाने वाला दे पायेगा क्या? तभी सिपाही भी 100 लेकर छोड़ देता है। दोनों का फायदा। यही Demo होता है Democracy में। किसी भी चौराहे पर बगल की गुमटी वाले से पूछ लो कि कैमरा चालू है की नही, बता देगा। फिर आप राजा हो, भौकाल से सिग्नल जंप कर निकलो।

लेखक सत्यब्रत त्रिपाठी जी के कलम से ..

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